Saturday, December 19, 2015

साहित्यकार अशोक लव दिल्ली पोयट्री सर्कल के मुख्य-संरक्षक

तेरह दिसंबर को2015 द्वारका नई दिल्ली में आयोजित सम्मान-समारोह और काव्य-संध्या में दिल्ली पोयट्री सर्कल के मुख्य-संरक्षक और साहित्यकार अशोक लव संबोधित करते हुए.

साहित्यकार अशोक लव को आचार्य विजयेंद्र स्नातक सम्मान


वरिष्ठ साहित्यकार अशोक लव ,नेशनल ला यूनिवर्सिटी में कवि-कवयित्रियों के साथ


साहित्यकार अशोक लव की अध्यक्षता में नेशनल ला यूनिवर्सिटी में काव्य-संध्या


अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति अमेरिका के दिल्ली चैप्टर के पदाधिकारी


साहित्यकार अशोक लव अध्यक्ष निर्वाचित


अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति अमेरिका की दिल्ली शाखा :काव्य गोष्ठी आयोजित

सुंदर लाल जैन सभागार ,अशोक विहार,नई दिल्ली में १५ नवम्बर २०१५को काव्य-आयोजित

वरिष्ठ कवि बाल स्वरूप राही को साहित्यकार अशोक लव ने सम्मानित किया


Saturday, June 27, 2015

अशोक लव ने एम.बी.ए. के विद्यार्थियों को संबोधित किया



   देश के सम्मान के साथ हमारा सम्मान जुडा हुआ है शिक्षाविद् अशोक लव
देश केवल ज़मीन का टुकड़ा नहीं है, यह हमारी आत्मा में बसा भाव है. इसके साथ ऐसा अपनत्व होता है कि इसके लिए प्राण तक न्यौछावर करने में सैनिक हिचकिचाते नहीं हैं. हम जहाँ भी, जिस रूप में भी कार्य कर रहे हैं हमें ऐसे कोई भी कार्य नहीं करने चाहिए जिससे देश का अहित हो, देश के सम्मान को ठेस न पहुँचे.- वरिष्ठ साहित्यकार और शिक्षाविद् अशोक लव ने एपीजे स्कूल ऑफ मैनेजमेंट, द्वारका,नई दिल्ली के एम.बी.ए. के विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा. ‘ सत्र 2015-17 विद्यार्थियों के साथ संवाद ‘ के अंतर्गत यह कार्यक्रम आयोजित किया गया था.
इससे पूर्व संस्थान के निर्देशक डॉ. आलोक सकलानी ने अशोक लव का स्वागत करते हुए कह कि अशोक लव बहुमुखी प्रतिभा संपन्न हैं. वे कवि हैं, लेखक हैं, शिक्षाविद् और समाजसेवी हैं. उनकी 125 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं. उनके साहित्य पर पी.एच.डी. और एम.फिल. हिया हैं. वे तीस वर्षों तक अध्यापन से संबद्ध रहे हैं.
अशोक लव ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि विद्यार्थी जीवन मनुष्य के भावी जीवन का आधार होता है. यह फिसलन भरा होता है. इस पर बढ़ते हुए टेढ़ी-मेढ़ी पगडंडियों से गुज़ारना पड़ता है. अनेक प्रलोभन अपनी ओर आकर्षित करते हैं. इन सबके मध्य अपना ध्यान अपने लक्ष्य पर केंद्रित रखना चाहिए. साधनहीन एकलव्य ने अपना ध्यान अपने लक्ष्य पर केंद्रित रकह और निरंतर अभ्यास से श्रेष्ठ धनुर्धर बना. एकलव्य मैनेजमेंट का विद्यार्थी नहीं था. उसने जीवन से प्रबंधन सीखा, मैनेजमेंट सीखा. मैनेजमेंट का अर्थ ही जीवन को सुव्यवस्थित ढंग से जीना है. अपने कार्यों का सुप्रबंधन करना है.
उन्होंने कहा कि देश हमारे लिए सर्वोपरि है. इसके सम्मान के साथ हमारा सम्मान जुडा हुआ है. जब देस पराधीन था तो देश के प्रत्येक नागरिक पर पराधीनता का कलंक लगा हुआ था. हमें इसे स्मरण रखना चाहिए. भारत महान देश है. इसके संसाधनों का समुचित उपयोग नहीं किया गया. ऐसी योजनाएँ नहीं बनाई गईं जिनसे देश विश्व के विकसित राष्ट्रों की श्रेणी में आता. आप विद्यार्थी जीवन के पश्चात समर्पित भाव से कार्य करके देश को उच्च शिखरों तक ले जाएँ. अपने सामने सदैव देश को रखें.
अशोक लव ने अपने अमेरिकी प्रवास के अनुभवों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज वहाँ भारतीयों का बहुत सम्मान है. भारतीय परिश्रमी और प्रतिभावान हैं. आई.टी. क्षेत्र में कार्यरत इंजीनियर, डॉक्टर, व्यवसायी सबके समर्पित भाव से कार्य करने के कारण ऐसा हुआ है. उनके सम्मान का अर्थ है भारत का सम्मान.  वहाँ बसे भारतीय हर साँस के साथ भारत को जीते हैं. हम यहाँ भारत में रह रहे हैं. हमारा कर्तव्य हो जाता है कि हम अपने कार्यों से देश और भारतीय संस्कृति की गरिमा को बढ़ाएँ. आज शिक्षा का स्वरूप बदल गया है. केवल साइंस या कामर्स ही नहीं अपितु आर्ट्स विषयों के साथ भी उच्च पदों पर पहुँचा जा सकता है. एम.बी.ए. बहुत महत्त्वपूर्ण विषय बन गया है. आई.टी. हो, चिकित्सा हो, डिफेंस हो  आज सब एम.बी.ए. अवश्य करते हैं. आप इसे गंभीरता से लें, मन लगाकर खूब पढ़ें. आपकी उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ ! साहित्यकार अशोक लव ने विशेष अनुरोध पर अपनी कुछ कविताएँ भी सुनाईं. संस्थान की ओर से डॉ.आलोक सकलानी ने उन्हें सम्मानित किया.

Tuesday, June 23, 2015

PAHAL Social Organisation(Regd) : AGM held on 13th June




Pahal Social Organisation held its 3rd Annual General Body Meeting on 13th June2015, at Sam International School, Sector 12, Dwarka, New Delhi. Audited financial Statement for the year 2014-15 was presented by K C Banerjee after the welcome address by the Pahal Founder & President Malay K Chakraborty. Brief introduction of both the PahalPathshala given by Dimple Gaur and Rama Sinha, followed by Anjali Parashar Nandi explaining about the recently developed Pahal website.
Selection of additional office bearers done in a democratic way. I M Khanna selected as Vice-President; five Joint Secretaries selected are- P K Datta, AnjulNath, T K Chakraborty, Anjali Parashar Nandi and VarshaAggrwal. Discussion planning regarding future events carried out after the reports of events & activities of the last year was presented by the Secretary ChamanLal Chopra. Guests of honours Mr DebasheeshBagchi, Dr Alok Saklani Dr Ashok Luv and Mr PP Bansal appreciated Pahal activities and the commitment of its members towards the betterment of the society. Pahal Souvenir was released jointly by theVice President and editorial team along with the guest of honours. AGM ended with vote of thanks followed by tea.

अशोक लव के बाल-गीत


Tuesday, June 9, 2015

समुद्र-मंथन, मंदार और आनंद शंकर माधवन / अशोक लव

आनंद शंकर माधवन के साथ भेंट । संस्मरण -अशोक लव।

Tuesday, June 2, 2015

मन तेरे से बंध गई.../ अशोक लव

Man  tere  se  bandh  gai ,mere  man  kee  dor,
Jidhar-jidhar too jaayegaa,chaloon sadaa us aur.
@Ashok Lav

Sunday, May 31, 2015

ऊँचे-ऊँचे भवन बने हैं / अशोक लव

ऊँचे-ऊँचे भवन बने हैं , उनकी छटा निराली है,
टूटा  फूटा जैसा घर है, अपना वही नगीना है.
@अशोक लव
@ Ashok Lav

Tuesday, May 26, 2015

"साहित्य सभी भाषाओँ में पुल बनाता है"-सैयद सिब्ते रज़ी (नैशनल ला यूनिवर्सिटी )


नेशनल ला यूनिवर्सिटी में नाटक-काव्य उत्सव

आज का कवि सामाजिक सरोकारों की कविता लिख रहा है. काव्य की विधा कोई भी हो — गीत, ग़ज़ल,दोहे, मुक्त छंद, कविता में संघर्ष करने वालों की पीड़ा की अभिव्यक्ति होनी आवश्यक है. ‘ दिल्ली पोयट्री सर्कल ‘ ने अच्छा काम किया है कि सब भाषाओँ के कवि-कवयित्रियों को आपस में जोड़ने के पुल का काम किया है. भाषाएँ अलग हो सकती हैं पर कविता के भाव और संवेदनाएँ समान रहती हैं.”-नेशनल ला यूनिवर्सिटी ,द्वारका,नई दिल्ली और ‘दिल्ली पोयट्री सर्कल’ द्वारा आयोजित काव्य-संध्या के मुख्य-अतिथि के रूप में पूर्व-राज्यपाल सैयद सिब्ते रज़ी ने क़ानून, साहित्य और समाज के संबंधों पर अपने विचार प्रकट करते हुए कहा.

नेशनल ला यूनिवर्सिटी में गत वर्षों से साहित्यिक आयोजन होते रहे हैं. इसी परम्परा में इक्कीस मई को यह आयोजन एसोसिएट प्रोफ़ेसर डॉ.प्रसन्नान्शु ने किया. इसमें अंग्रेज़ी के चार नाटकों का मंचन किया गया. इसके पश्चात ‘क़ानून और कविता’ विषय पर सर्वभाषा काव्य-कार्यशाला और काव्य-संध्या का आयोजन किया गया. विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने सिल्वर बॉक्स, ट्रायल बाय जूरी, पिगमलिअन, ए मेलाफेक्टर इन चार नाटकों का डॉ. प्रसन्नान्शु के मार्गदर्शन में प्रभावशाली मंचन किया. अभिनय और मंचन के तकनीकी पक्ष पर बोलते हुए निर्णायक मंडल की सदस्या श्रीमती नीता अरोडा ने इनकी भूरी-भूरी प्रशंसा की. इसके पश्चात डॉ.प्रसन्नान्शु और वरिष्ठ साहित्यकार डॉ.अशोक लव ने ‘कानून और कविता’ विषय पर आयोजित कार्यशाला में विद्यार्थियों से कविता के विभिन्न पक्षों पर चर्चा की तथा विद्यार्थियों ने कविताएँ भी लिखीं. इस कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों में काव्य-सौंदर्य की अनुभूति कराना और लेखन के लिए प्रोत्साहित करना था. विद्यार्थियों ने कविताएँ लिखीं.श्रेष्ठ चार कविताओं का चयन किया गया.

इसके पश्चात बहुभाषी काव्य-संध्या का आयोजन किया गया. इसका आयोजन ‘दिल्ली पोयट्री सर्कल’ और ‘नेशनल ला यूनिवर्सिटी’ की ओर से किया गया.विश्वविद्यालय की छात्रा अन्न्पूरनी सुब्रमणयम ने विश्वविद्यालय की ओर से कार्यक्रम का संचालन करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. अशोक लव से अध्यक्षता करने का अनुरोध किया. मुख्य-अतिथि सैयद सिब्ते रज़ी (पूर्व राज्यपाल, असम और झारखंड) का मंच पर स्वागत किया गया. इसके पश्चात संस्था के अध्यक्ष डॉ. प्रसन्नान्शु, सचिव प्रेम बिहारी मिश्रा, वित्त सचिव वी.की.मंसोत्रा, संयुक्त सचिव ताराचंद शर्मा ‘नादान’ और विशिष्ट-अतिथियों डॉ.राजेंद्र गौतम, श्री मुकेश सिन्हा, डॉ. विवेक गौतम, डॉ. चंद्रमणि ब्रह्मदत्त और श्री भोगेन्द्र पटेल को मंच पर आमंत्रित किया गया. मुख्य-अतिथि, अध्यक्ष और विशिष्ट-अतिथियों ने माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण किया और दीप प्रज्वलित करके कार्यक्रम का शुभारंभ किया. श्री प्रेम बिहारी मिश्रा ने काव्य-संध्या का संचालन किया. डॉ. प्रसन्नान्शु ने ‘दिल्ली पोयट्री सर्कल’ के अध्यक्ष के रूप में तथा विश्विद्यालय की ओर से मुख्य-अतिथि, विशिष्ट-अतिथियों और कवि-कवयित्रियों का स्वागत किया. श्री प्रेम बिहारी मिश्रा ने डॉ. अशोक लव से अनुरोध किया किया कि वे संस्था के मुख्य-संरक्षक के रूप में ‘दिल्ली पोयट्री सर्कल’ के विषय में बताएँ. डॉ.अशोक लव ने बताया कि वे जब आए तब यहाँ द्वारका में कोई साहित्यिक मंच नहीं था. श्री प्रेम बिहारी मिश्रा से संपर्क के पश्चात डॉ.प्रसन्नान्शु और अन्य कवियों से मिले तथा सुख-दुख के साथी,द्वारका सिटी,लायन्ज़ क्लब आदि संस्थाओं के साथ छह काव्य-संध्याएँ आयोजित कीं.इस प्रकार ‘दिल्ली पोयट्री सर्कल’ का गठन हुआ. यह हमारी तीसरी काव्य-गोष्ठी है.

सैयद सिब्ते रज़ी ने वरिष्ठ साहित्यकार अशोक लव की ‘कादंबरी’ पुस्तक श्रृंखला की छह पुस्तकों और मधुर गीतकार वीरेंद्र कुमार मंसोत्रा के पाँचवें काव्य-संग्रह ‘जय हिंद’ का लोकार्पण किया. इसके पश्चात ताराचंद शर्मा ‘नादान’ की सरस्वती-वंदना से काव्य-संध्या आरंभ हुई. अनिल उपाध्याय,डॉ.राजेंद्र गौतम, डॉ.रमेश सिद्धार्थ, नरेश शांडिल्य,शुभदा बाजपेई, डॉ.विवेक गौतम, अस्तित्व अंकुर, मनीष मधुकर और डॉ. भावना शुक्ला की रचनाओं ने श्रोताओं का मन मोह लिया. कमर बदरपुरी के सादगी से पढ़े शेर जब-जब भी संयोग मिले/ कितने अच्छे लोग मिले. का सबने तालियों से स्वागत किया. डॉ. प्रसन्नान्शु ने इंग्लिश में प्रभावशाली कविताएँ सुनाईं. मनोहर लूथरा ने भी इंग्लिश में कविता-पाठ किया.मधुर गीतकार वी.के.मंसोत्रा ने पंजाबी में रंग जमा दिया. प्रेम बिहारी मिश्रा की प्रेम भाव की कविताओं पर खूब तालियाँ बजीं. इनके अतिरिक्त डॉ.राजीव श्रीवास्तव,राजेंद्र चुघ, अनिल वर्मा मीत, गजेन्द्र प्रताप सिंह,सुनील हापुडिया, डॉ.प्रबोध, मुकेश निरुला, इरफ़ान रही, प्रेम शर्मा, अरविंद योगी, डॉ,तृप्ति माथुर, सुखवर्ष कंवर ’तनहा’,पंकज शर्मा, अजय अक्स, दिनेश सोनी मंजर, संदीप शज़र, मुकेश अलाह्बादी आदि कवि-कवयित्रियों की कविताओं-घज्लों-गीतों ने रंग जमा दिया.डॉ अशोक लव ने अपने अध्यक्षीय भाषण में संक्षेप में पढ़ी कविताओं पर अपने विचार रखे और अपनी कविता और दोहे सुनाये-‘थकी-थकी-सी ज़िंदगी,थके-थके से लोग/थके-थके से चल रहे, है यह कैसा रोग.’

डॉ.प्रसन्नान्शु ने मुख्य-अतिथि सैयद सिब्ते रज़ी और विश्विद्यालय के कुलपति,रजिस्ट्रार, विद्यार्थियों,’दिल्ली पोयट्री सर्कल’ के पदाधिकारियों,श्रोताओं तथा कवि -कवयित्रियों का धन्यवाद किया. 











Sunday, May 17, 2015

दीपक जलकर है करे../अशोक लव


Poet Ashok Lav presented his books to Syed Sibte Razi ( Ex-Governor)

हिंदी के वरिष्ठ साहित्यकार अशोक लव ने अपनी पुस्तकें 'लड़कियाँ छूना चाहती हैं आसमान ' और 'खिड़कियों पर टंगे लोग' पूर्व राज्यपाल सैयद सिब्दे रज़ी को भेंट की. उन्होंने अशोक लव के साहित्यिक योगदान की प्रशंसा की. इस अवसर पर नेशनल ला यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर तथा दिल्ली पोएट्री सर्कल के अध्यक्ष डॉ. प्रसंनान्शु भी उपस्थित थे. 
 Dr Prasannanshu, Dr Ashok Lav, Syed Sibte Razi, Syed Mohammad Razi are in the pictures.

Friday, May 8, 2015

"कविता सबको जोड़ती है "--डॉ. प्रसन्नान्शु



                  ‘सुंदर जग इतना बना,अटक-अटक मन जाए’ कविता के रंग  

दिल्ली पोयट्री सर्कलकी ओर से 26अप्रेल, को सेक्टर-6, द्वारका, नई दिल्ली में काव्य-गोष्ठी का आयोजन किया गया.इसमें दिल्ली, नोएडा, गाज़ियाबाद, जयपुर, झज्झर, सिरसा आदि क्षेत्रों से आए कवि-कवयित्रियों ने कविता-पाठ किया. यह अखिल भारतीय गोष्ठी  चार घंटे तक चली.इसमें 41 से अधिक कवि उपस्थित थे.संस्था के मुख्य संरक्षक और वरिष्ठ साहित्यकार अशोक लव ने काव्य-गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए कहा दिल्ली पोयट्री सर्कल का गठन सर्वभाषा साहित्य को मंच प्रदान करना है. आज विभिन्न भाषाओँ की कविताओं का पाठ किया गया है.इससे हम आशान्वित हुए हैं.यह गोष्ठी सर्वभाषा समभाव को प्रकट करती है.
गोष्ठी के आरम्भ में नेपाल व उत्तरी भारत में आए भूकम्प में जीवन खोने वाले लोगों को श्रद्धांजली अर्पित की गई.  प्रोफेसर सुधेश और कमर बदरपुरी सहित अन्य वरिष्ठ साहित्यकारों के सानिध्य में संस्था के पदाधिकारियों अशोक लव, प्रेम बिहारी मिश्र, वीरेन्द्र कुमार मंसोत्रा और ताराचंद शर्मा नादानद्वारा माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण के पश्चात, युवा कवि मनीष मधुकरने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की और गोष्ठी का आरम्भ उनकी इस प्रभावशाली ग़ज़ल से हुआ.अन्य कवियों ने एक एक कर के अपनी रचनाओं का पाठ किया और गोष्ठी निरंतर ऊँचाइयों को छूती चली गई| सम्पूर्ण कार्यक्रम में विभिन्न विधाओं की कविताओं का अपना ही रंग था|
वीरेन्द्र कुमार मंसोत्रा की डोगरी कविता की अपनी छटा थी तो टी.एस. माटा की कविता ने पंजाबी रंग में रंग  दिया. मनोहर लाल लूथरा ने भूकम्प की विभीषिका और किसानों की दुर्दशा का मार्मिक वर्णन अंग्रेज़ी कविताओं में किया वहीं कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ कवि अशोक लव ने गोष्ठी की धारा को अपने दार्शनिक दोहों से नया रंग दे दिया
और और की चाह में, गठरी भरता जाए,
इतनी गठरी बाँध ली, उठा नहीं अब पाए.
सुन्दर जग इतना बना, अटक अटक मन जाए,
जिसने भेजा था यहाँ, उसे दिया बिसराय.
चन्द्रकान्ता सिवाल ने भी कुछ ऐसे ही भाव की रचना पढ़ी. कवियत्री नीना सहरने तेज़ी से बदलते समय को इस प्रकार अभिव्यक्त किया और क्या अब लिखें कहानी भी वक़्त भी जा चुका, जवानी भी.


 अस्तित्व अंकुरकी ग़ज़ल,मास्टर महेंद्र की हास्य-कविता,अशोक शर्मा, ध्रुव कुमार गुप्ता, शैफाली सुरभि, पंकज शर्मा, डॉ. सीमा गुप्ता शारदा’, पी.के. शर्मा, सुखवर्ष कँवर तन्हादिनेश चन्द्र नागर, मदन लाल अहूजा, राजेन्द्र महाजन, राजीव ‘रियाज़’ और  वरिष्ठ ग़ज़लकारा डॉ. कुमारी नीलम की ग़ज़लों ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया.
दिल्ली पोएट्री सर्कल’ के अध्यक्ष डॉ प्रसन्नान्शु ने अपने संदेश में कहा कि कविता मनुष्य को मनुष्य से जोड़ती है. साहित्य के माध्यम से विभिन्न भाषाओँ के साहित्यकारों को एक-दूसरे के साथ जोडने के लिए इस मंच का गठन किया गया है.श्री राजेन्द्र चुघ की लम्बी कविता ख़यालने श्रोताओं को बाँधे रखा. प्रेम बिहारी मिश्रा,अब्दुल जब्बार खान,सत्य प्रकाश भारद्वाज, संतोष बंसल, शोभना मित्तल, सूक्ष्मलता महाजन, डॉ.भावना शुक्ल, अनिल वर्मा मीतऔर ताराचंद शर्मा की पंक्तियाँ सराही गईं. गोष्ठी का समापन सभा के अध्यक्ष श्री अशोक लव द्वारा विभिन्न रचनाओं पर संक्षिप्त टिप्पणियों से हुआ. प्रेम बिहारी मिश्र ने कार्यक्रम का कुशल सञ्चालन किया तथा संस्था के अन्य पदाधिकारियों ताराचंद शर्मा, वीरेन्द्र कुमार मंसोत्रा और डॉ. चंद्रमणि ब्रह्मदत्त ने अहम भूमिका निभाई